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मैं चाहता हूं कि मेरे देश की बेटियां अब गुड़िया नहीं, कलम और किताब मांगें

कैसे हैं साथियों? बहुत दिनों से मैं आपके बीच एक बात रखना चाहता था। इसके लिए मैंने कई बार इरादा किया और कई बार बदला। मैंने इरादा इसलिए बदला, क्योंकि मैं सोच रहा था कि कहीं मेरा मखौल तो नहीं उड़ाया जाएगा! आखिरकार मैंने तय किया कि यह बात कहनी चाहिए। यदि इसके एवज में मेरा मखौल उड़े तो उसके लिए मैं तैयार हूं। आज मैं आपको मेरे जीवन की एक घटना बताना चाहता हूं। शायद 2004 या उससे कुछ पहले की बात है। मैं मेरे गांव कोलसिया के जिस राजकीय विद्यालय में पढ़ता था, वहां एक छोटी लाइब्रेरी भी थी। मैं वहां से एक किताब लेकर आया जिसमें बहुत ही खूबसूरत कहानी थी। कहानी कुछ इस तरह थी कि किसी देश में एक बच्चा बेहद मुश्किल हालात में पढ़ाई कर रहा था। उसकी आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। किताबें खरीदने के लिए पैसे नहीं थे। सर्दियों का मौसम उसे बहुत परेशान करता था क्योंकि जो इकलौता पुराना कोट वह पहना करता, कई जगहों से फट चुका था। बहुत मुश्किल हालात में भी उसने इरादा नहीं बदला। अध्ययन के प्रति उसका रुझान कम नहीं हुआ। उसे तकलीफ में देख एक औरत ने उसकी मदद करनी चाहिए। एक रोज वह ​कुछ किताबें और कुछ रकम (शायद 20 डॉलर...

हर विद्यार्थी के लिए उपयोगी है 'आपणी पोथी' की सामान्य हिंदी

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पुस्तक: असली सामान्य हिंदी । लेखक: डॉ. रोशन वर्मा । प्रकाशक: आपणी पोथी, सीकर रोड, नवलगढ़, जिला- झुंझुनूं (राज.)-333 042 । फोन नं.: 9887 803 616 और 9414 362 312 । पृष्ठ संख्या: 376 । मूल्य: 200 रुपए।  हिंदी यानी हिंदुस्तान की धड़कन, वह जरिया जो हमें आपस में जोड़ता है। आज पूरे विश्व में हिंदी की धाक बढ़ रही है, परंतु आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि हिंदी बोलने, पढ़ने और समझने वाले हजारों या इससे कहीं ज्यादा लोग प्रतियोगी परीक्षाओं में इसीलिए असफल हो जाते हैं क्योंकि उनकी हिंदी ठीक नहीं होती।  इसका एक प्रमुख कारण यह भी हो सकता है कि विद्यालय स्तर पर ही कई विद्यार्थी हिंदी को ज्यादा गंभीरता से नहीं लेते। हिंदी व्याकरण पर वे ज्यादा ध्यान नहीं देते। यह अनदेखी उन्हें बाद में परेशान करती है जब वे प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठते हैं और एक के बाद एक परीक्षाओं में असफल हो जाते हैं। वे गणित, अंग्रेजी, विज्ञान, सामान्य ज्ञान जैसे विषयों में तो अच्छा प्रदर्शन करते हैं परंतु हिंदी में गलतियों की वजह से नतीजों में उन्हें निराशा ही हासिल होती है।  राजस्थान के नवलगढ़ शहर के...

क्यों होता है सिलियक रोग या गेहूं से एलर्जी? डॉ. राजीव नागर से जानिए सावधानी और उपचार

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Image Courtesy: PixaBay अन्न में गेहूं को राजा माना गया है। यह हमारे शरीर को पुष्ट करता है। गेहूं में मौजूद पौष्टिक तत्व तन और मन को शक्ति देते हैं। दुनिया के कई देशों में लोग गेहूं को अपने भोजन में शामिल करते हैं। यह कैल्शियम, आयरन, विटामिन, थायमिन और फाइबर से भरपूर होता है, जो अनिद्रा, घबराहट, चिड़चिड़ापन, व्यवहार में असंतुलन जैसी समस्याओं को दूर रखने में सहायक होते हैं। परंतु यह देखकर आश्चर्य होता है कि कुछ लोगों को गेहूं से एलर्जी होती है।  क्या हैं कारण गेहूं में पाए जाने वाले ग्लूटेन (gluten) प्रोटीन का शरीर में पाचन नहीं होने से यह समस्या पैदा होने लगती है। इसमें मरीज की छोटी आंत (small intestine) की अंदर की परत नष्ट होने लगती है। इसके बाद संबधित व्यक्ति को गेहूं से एलर्जी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। क्या हैं लक्षण प्रभावित व्यक्ति में कई लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे- दस्त, पेट फूलना, कब्ज, खून की कमी, लंबाई न बढ़ना, नाखून न बढ़ना, चिड़चिड़ापन, सुस्ती, याददाश्त कमजोर होना, हड्डियों में दर्द, अवसाद (depression), बेचैनी महसूस करना और विटामिन 12 की क...

गणित में सरसता और आनंद

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पुस्तक: गणित में सरसता और आनंद । लेखक: लायकराम शर्मा । प्रकाशक: यूनीकॉर्न बुक्स, जे-3/16, दरियागंज, नई दिल्ली-110 002 । फोन नं.: 011-2327 6539, 2327 2783, 2327 2784 । पृष्ठ संख्या: 135 । मूल्य: 64 रुपए।  प्राय: गणित को एक कठिन विषय माना जाता है। इसकी कई वजह हो सकती हैं, लेकिन एक खास वजह है — गणित पढ़ाने के रूखे तौर-तरीके, जो विद्यार्थियों में इस विषय के प्रति रुचि पैदा नहीं करते।  लायकराम शर्मा की पुस्तक 'गणित में सरसता और आनंद' इस दिशा में एक बेहतरीन प्रयास है, क्योंकि उन्होंने गणित के प्रति विद्यार्थियों में रुचि जाग्रत करने की कोशिश की है। इस पुस्तक को पढ़ने के बाद हर कोई यकीन करेगा कि सच में गणित विषय बहुत सरस है। यह भी बहुत आनंददायक है और इससे घबराने की कोई जरूरत नहीं है। पुस्तक के कुछ अध्याय इस प्रकार हैं जो पाठक की गणित के प्रति रुचि जगाते हैं — गणित, सौंदर्य और सत्य, अंकों का पिरामिड, गणितीय चिह्नों का चमत्कार, पहाड़ों की सरसता, वर्ग करने की सरलतम विधियां, असत्य को ​सत्य सिद्ध करना, अध्यात्म का गणितीय विवेचन, भारत के प्रसिद्ध गणितज्ञ, भाग विधि ...

दिव्यात्मा सोहन लाल दूगड़

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पुस्तक: दिव्यात्मा सोहन लाल दूगड़ । लेखक: नलिन सराफ । प्र​काशक: भगत सिंह दूगड़, 405/406, शारदा चैम्बर्स, न्यू मरीन लाइंस, मुंबई-400 020 । फोनं.: 022-2623 1498, 9821 042 840 । पृष्ठ संख्या: 140 । मूल्य: 150 रुपए । राजस्थान की धरती ने देश को अनेक संत-महात्मा, शूरवीर और उद्योगपति दिए हैं। खासतौर पर शेखावाटी को तो इनकी खान कहा जाता है। यहां का फतेहपुर कस्बा अपनी खूबियों में निराला है। यहां 20 जून 1895 को एक अभावग्रस्त परिवार में जन्मे सोहन लाल दूगड़ मानव रत्न थे। यह पुस्तक उन्हीं के जीवन पर आधारित है, जिसकी बेहतरीन प्रस्तुति के लिए लेखक नलिन सराफ के परिश्रम को सराहा जाना चाहिए। सोहन लाल दूगड़ अर्थाभाव के कारण व्यवस्थित रूप से शिक्षा नहीं पा सके, परंतु उन्होंने अपनी सूझबूझ से ​जीवन में सफलता प्राप्त की। हमारे समाज में प्र​चलित यह उक्ति उन्हीं के लिए बनी है कि सौ हाथों से कमाओ और हज़ार हाथों से दान करो। सोहन लाल दूगड़ इसी कोटि के एक महादानी पुरुष थे।  उन्होंने अपने जीवन में अनेक विद्यालय, प्याऊ, पुस्तकालय आदि खुलवाए। यही नहीं, ब्रिटिश शासन के दौरान कई स्वतंत्रता...

पवित्र क़ुरआन, सुगम हिंदी अनुवाद मूल अरबी सहित

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पुस्तक: पवित्र क़ुरआन (सुगम हिंदी अनुवाद मूल अरबी सहित) । अनुवादक: डॉ. मुहम्मद अहमद । प्रकाशक: मधुर संदेश संगम, ई-20, अबुल-फ़ज़्ल इन्कलेव, जामिया नगर, नई दिल्ली - 110 025 । फोन नं.: 011-2695 3327, 0921 235 6332 । पृष्ठ संख्या: 928 ।  क़ुरआन इस्लाम का पवित्र धर्मग्रंथ है, जो मूलत: अरबी भाषा में है। जो अरबी नहीं जानते, उनके लिए अन्य भाषाओं में इसके अनुवाद उपलब्ध हैं। क़ुरआन का हिंदी अनुवाद डॉ. मुहम्मद अहमद ने किया है जो बहुत सहज और सरल है। यह अनुवाद अरबी से उर्दू में मौलाना मुहम्मद फ़ारूक़ ख़ां ने किया था।  डॉ. मुहम्मद अहमद ने सिर्फ शब्दों का अनुवाद नहीं किया है, बल्कि मूल अरबी क़ुरआन के भाव को भी इसमें बरकरार रखा है। इसलिए यह साधारण साक्षर से लेकर विद्वानों तक के लिए पठनीय हो गया है।  पुस्तक की शुरुआत में विषय-सूची के साथ उन घटनाओं का भी जिक्र किया गया है जो उस सूरह में शामिल होंगी। पुस्तक में विस्तृत टीका-टिप्पणी नहीं की गई है लेकिन अनुवाद के शब्दों का चयन इतना सरल है कि अधिक विस्तार की कोई जरूरत नहीं रही। पुस्तक में सिर्फ आयतों का अनुवाद नहीं दि...

सत्य एवं प्रेरक घटनाएं

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पुस्तक: सत्य एवं प्रेरक घटनाएं । लेखक: भक्त रामशरणदास पिलखुवा । प्रकाशक: गीता प्रेस, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश- 273 005 । फोन नं. : +91-551 - 2333030, 2334721 Ext. 251/250  ।  पृष्ठ संख्या: 191 । मूल्य: 28 रुपए ।  प्रेरक साहित्य प्रकाशन के क्षेत्र में गीता प्रेस एक जाना-पहचाना नाम है। यूं तो इसकी अनेक पुस्तकें पठनीय हैं परंतु 'सत्य एवं प्रेरक घटनाएं' नामक पुस्तक सभी को एक बार जरूर पढ़नी चाहिए। पुस्तक के हर अध्याय में शब्दों का चयन बहुत सोच-समझकर किया गया है और कीमत भी इतनी कि हर पुस्तक-प्रेमी आसानी से खरीद सके।  जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, इसमें उन घटनाओं का उल्लेख किया गया है जो सत्य हैं, साथ ही प्रेरक भी। लेखक रामशरणदास पिलखुवा ने वर्षों पूर्व सत्य घटनाएं लिखी थीं, जिन्हें बाद में 'कल्याण' पत्रिका में प्रकाशित किया गया। उन्हीं घटनाओं को संगृहीत कर यह पुस्तक तैयार की गई है। पुस्तक के कुछ अध्यायों के नाम इस प्रकार हैं — अशुद्ध आहार का प्रभाव, दो विचित्र स्वप्न, गांव की बेटी अपनी बेटी, कैलास-मानसरोवर में सिद्ध योगी महात्माओं के दर्शन, पूर्वजन्म का अ...

16 साल की इस लड़की की बातें दिग्गज सीईओ ध्यान से क्यों सुन रहे हैं?

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Image Courtesy - Stars And Stripes   प्लास्टिक के इस्तेमाल से हमारी ज़िंदगी आसान हुई है लेकिन कई बार ऐसा भी हुआ जब यह पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती बन गया। इसलिए दुनियाभर में प्लास्टिक के कम से कम इस्तेमाल और उसके सही ढंग से निस्तारण के लिए काफी चर्चा हो रही है। कई लोगों ने तो धरती बचाने के लिए एक अभियान चला दिया है।  बदलाव के इन्हीं पैरोकारों में शामिल हैं शैल्बी ओ. नील, जिन्होंने महज 16 साल की उम्र में धरती बचाने की वह मुहिम छेड़ रखी है। उनका जिक्र कई देशों के मीडिया में हो रहा है। शैल्बी ने प्लास्टिक का उपयोग रोकने की अपील की है। कई लोगों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया लेकिन कुछ कंपनियां आगे आईं और उन्होंने इस मुहिम में भाग लेते हुए इसे सराहा। उनकी अपील के बाद कई बड़ी कंपनियों ने प्लास्टिक स्ट्रा का उपयोग बंद या बहुत कम कर दिया है। वे अब इसका विकल्प ढूंढ़ रही हैं, क्योंकि प्लास्टिक स्ट्रा से पर्यावरण को काफी नुकसान होता है। शैल्बी ने एक साल पहले डिग्निटी हैल्थ, जो सैन फ्रांसिस्को में स्थित है, के सीईओ को ईमेल किया। शैल्बी ने उनका ध्यान कंपनी के एक विज्ञापन की...

एक और भारतीय छात्र की प्रतिभा को गूगल का सलाम, दिया करोड़ों का पैकेज

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Image Courtesy - The News Minute दुनिया की दिग्गज कंपनियों में भारतीयों का दबदबा बढ़ता जा रहा है। प्रतिष्ठित इंटरनेट कंपनी गूगल ने भारतीय छात्र आदित्य पालीवाल को 1.2 करोड़ रुपए सालाना पैकेज आॅफर किया है। आदित्य बेंगलूरु से हैं। गूगल का आॅफर मिलने के बाद पूरे भारत में उनकी चर्चा हो रही है।  उन्होंने इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलजी, बेंगलूरु से पढ़ाई की है। उन्होंने इंटिग्रेटेड एमटेक डिग्री ली है। गूगल में चयन होने के बाद वे न्यूयॉर्क स्थित गूगल आर्टिफिशल इंटेलिजेंस रीसर्च विंग में सेवा देंगे।  यहां तक पहुंचने के लिए आदित्य को 6 हजार प्रतियोगियों से मुकाबला करना पड़ा। आखिरकार गूगल ने 50 का चयन किया, जिनमें से आदित्य भी एक हैं। इससे पहले आदित्य एसीएम इंटनैशनल कॉलेजिएट प्रोग्रामिंग कॉन्टेस्ट 2017-2018 के फाइनलिस्ट रहे हैं, जो कंप्यूटर लैंग्वेज कोडिंग की मशहूर प्रतियोगिता है। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि गूगल की ओर से आॅफर मार्च में ही मिल गया था। उन्होंने अपने चयन पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि गूगल में काम करते हुए बहुत कुछ नया सीखने को मि...

गूगल ने माना भारतीय प्रतिभा का लोहा, बिहार के छात्र को दिया 1.20 करोड़ का पैकेज

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Image Courtesy - Nai Dunia भारतीय प्रतिभा का डंका पूरे विश्व में बज रहा है। मशहूर सर्च इंजन गूगल ने बिहार के आदर्श कुमार को एक करोड़ बीस लाख रुपए सालाना के पैकेज पर नौकरी दी है। बीबीसी की एक ख़बर के मुताबिक, आदर्श ने आईआईटी रूड़की से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री ली है और वे अपना करियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर शुरू कर रहे हैं। आदर्श बहुत प्रतिभाशाली विद्यार्थी रहे हैं। उन्होंने बारहवीं की परीक्षा में गणित और रसायन विज्ञान में 100 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। उन्हें आईआईटी रूड़की में मैकेनिकल ब्रांच मिली जो उन्हें खास पसंद नहीं आई। चूंकि गणित उनका पसंदीदा विषय था, इसलिए वे प्रोग्रामिंग में दिलचस्पी लेने लगे।  आदर्श के मुताबिक, गणित के मुश्किल सवालों को हल करने के लिए अलग-अलग नजरिए से सोचना पड़ता है। इसी खूबी ने उन्हें सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर बनने में मदद की। इंजीनियरिंग के चौथे साल तक उन्होंने प्रोग्रामिंग में खासी महारत हासिल कर ली थी। कैंपस सेलेक्शन के दौरान वे एक कंपनी के लिए चुन लिए गए।  इसके बाद उन्होंने गूगल में अप्लाई किया। वहां उन्हें कई प्रकार के टे...

भारतीय छात्र को गूगल ने दिया 2 लाख का इनाम, जरूरतमंदों को दे दी पूरी रकम

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Imaage Courtesy - ZeeNews   दुनिया का सबसे बड़ा सर्च इंजन गूगल एक भारतीय छात्र की प्रतिभा का इतना कायल हुआ कि उसने दो लाख रुपए बतौर इनाम देने का ऐलान किया है। हालांकि छात्र ने राशि यह कहकर लेने से इनकार कर दिया कि इसे जरूरतमंदों में बांट दिया जाना चाहिए। हिंदुस्तान की एक ख़बर के मुताबिक, पटना के नौवीं कक्षा के छात्र आर्यन राज ने यह उपलब्धि हासिल की है।  आर्यन ने दो एप कंप्यूटर शॉर्टकट कीज़ और वॉट्सएप क्लीनकर लाइट बनाए हैं। गूगल ने ये एप छात्र से खरीदे हैं। साथ ही इतनी कम उम्र में एप बनाने पर आर्यन की तारीफ भी की है। गूगल प्लेस्टोर पर इन दोनों एप्स को यूजर अच्छी रेटिंग दे रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, दोनों ही एप इस्तेमाल करने में काफी आसान हैं। कंप्यूटर शॉर्टकट कीज़ को खास तरह से डवलप किया गया है। इससे ज्यादा तेजी से काम किया जा सकता है।  आर्यन द्वारा बनाया हुआ वॉट्सएप क्लीनकर लाइट एप भी काफी उपयोगी है। यह वॉट्सएप पर आने वाले वायरस आदि को स्कैन कर देता है। इसमें और भी काफी फीचर्स हैं जो यूजर के लिए फायदेमंद हैं। इन्हीं सब खूबियों को देखकर यूजर्स ने आ...

धमाकों से तबाह हो गए स्कूल तो यूट्यूब से पढ़ाई करने लगा यह बच्चा

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अफगानिस्तान कई दशकों से आतंकवाद और हिंसा से पीड़ित है। इस वजह से यहां के आम लोगों की ज़िंदगी बहुत ज्यादा मुश्किलों से भरी हुई है। बंदूक की गोलियां बंकर और स्कूल की इमारतों में फर्क नहीं कर सकतीं, इसलिए कई इलाकों में स्कूल तबाह हो गए और वहां शिक्षा का कोई पुख्ता बंदोबस्त नहीं है, लेकिन ये तमाम हालात एक बच्चे के हौसले को डिगा नहीं पाए। उसका नाम फरहद नूरी है। करीब 10 साल का फरहद पेंटिंग में खासी दिलचस्पी रखता है। जब स्कूल में पढ़ाई चौपट हो गई तो उसने मोबाइल फोन को अपना स्कूल बना लिया और यूट्यूब को क्लास रूम। इसके जरिए वह पेंटिंग के गुर सीख रहा है। उसकी बनाई पेंटिंग्स की सोशल मीडिया पर काफी चर्चा है। अफगानिस्तान में लगातार हो रही हिंसा के कारण फरहद के परिवार ने देश छोड़ दिया। अब वे सर्बिया के शरणार्थी कैंपों में रह रहे हैं। वे ईरान से मिस्र होते हुए इन कैंपों तक पहुंचे और काफी मुश्किलों का सामना किया।  इन मुश्किल हालात में पढ़ाई-लिखाई की उम्मीदें धूमिल होने लगीं तो फरहद ने मोबाइल फोन और यूट्यूब की मदद ली। वह पेंटिंग बनाने के वीडियो देखने लगा और सिखाई गई बारीकियों के ...

जिसे हॉर्वर्ड ने 10 बार रिजेक्ट किया, वो चीन का सबसे धनी शख्स बना

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Image - LifeRu अगर आप इंटरनेट के बारे में जरा भी जानते हैं तो यकीनन अलीबाबा का नाम सुना होगा। हम बात कर रहे हैं चीन के मशहूर उद्योगपति जैक मा द्वारा स्थापित कंपनी अलीबाबा की। आज इसकी गणना विश्व की बड़ी कंपनियों में होती है और जैक मा दुनिया के सबसे ज्यादा धनी लोगों की सूची में शामिल हैं, पर एक वक्त था जब जैक को हर जगह रिजेक्ट किया जा रहा था।   तब जैक जहां नौकरी के लिए आवेदन करते, उन्हें नकार दिया जाता। जैक मा का जन्म 10 सितम्बर 1964 को चीन के हांगजोऊ में हुआ था। उनके माता-पिता बहुत साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि से थे। वे चीन के परंपरागत नाटक और कहानियां सुनाकर गुजारा किया करते थे। स्कूली दिनों से ही जैक अंग्रेजी में दिलचस्पी लेने लगे। वे कई बार होटलों की ओर चले जाते जहां विदेशी पर्यटकों से अंग्रेजी में बातचीत की कोशिश करते। वे स्थानीय गाइड का काम करने लगे। इससे उन्हें अंग्रेजी भाषा सीखने में मदद मिली। साथ ही विदेशी संस्कृति से परिचय हुआ। हालांकि जैक शुरुआती पढ़ाई में बहुत अच्छे नहीं थे। पांचवीं कक्षा में वे दो बार फेल हुए। इसी प्रकार आठवीं में तीन बार फेल हुए। उन्...

हिंसा और तलाक का दर्द झेला पर हार नहीं मानी, अपने दम पर बनीं मशहूर सिंगर

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Image - Sita Qasimi FB Page दुनिया के कई देशों में महिलाओं की स्थिति बहुत दयनीय है। वहां उनके अधिका​रों का सम्मान नहीं किया जाता और उन्हें बुरे हालात का सामना करते हुए ज़िंदगी बितानी पड़ती है। शायद इसीलिए कवि मैथिलीशरण गुप्त ने लिखा था - अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी, आंचल में दूध और आंखों में पानी।  कुछ ऐसा ही अफगानिस्तान की सीता कासमी के साथ हुआ था, जिन्होंने कई बुरे दौर देखे, लेकिन आज वे अपने देश का चमकता सितारा हैं। वे अफगानिस्तान की बहुत मशहूर सिंगर हैं। उनका जन्म 6 अप्रेल 1983 को काबुल में हुआ था।  जैसा कि आप जानते हैं, अफगानिस्तान बुरी तरह से आतंकवाद से पीड़ित है। आज तक वहां खूनखराबे का माहौल है जो उस वक्त भी था। ऐसे में सीता कासमी को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सुकून की तलाश में उनका परिवार पाकिस्तान आ गया लेकिन उनके लिए यहां भी कई समस्याएं तैयार खड़ी थीं। परिवार पाकिस्तान में स्थायी रूप से रहना चाहता था, इसलिए सिर्फ 15 साल की उम्र में सीता कासमी की शादी पाकिस्तानी शख्स से कर दी गई। वह उम्र में बहुत बड़ा था। बाद में पता उन्हें चला कि व...

सिर्फ 7 साल की उम्र में यह बच्चा कमा रहा है लाखों रुपए

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Image - China Daily बचपन हर किसी की यादों में समाया ज़िंदगी का वह समय होता है जिसे हम अक्सर याद करते हैं। आमतौर पर बचपन खेलकूद और कुछ शरारतों से भरा होता है लेकिन चीन का एक बच्चा इन तमाम मान्यताओं को गलत साबित कर रहा है। वह हर साल लाखों रुपए कमा रहा है। वह बहुत व्यस्त रहता है और उसके पास खेलकूद, शरारतों आदि के लिए कोई समय नहीं है। चाइना डेली में छपी एक खबर के अनुसार, सुन चुयांग नामक यह बच्चा अभी सिर्फ सात साल का है। वह एक साल में करीब 10 लाख रुपए तक कमा लेता है। सुन चीनी लोगों को योग सिखाता है।  उसका ताल्लुक पूर्वी चीन के जेजियान प्रांत से है। योग सिखाते हुए वह काफी मशहूर हो गया है और इसी के साथ उसकी कमाई भी बढ़ने लगी है। सोशल मीडिया पर इसे चीन का नन्हा योगगुरु कहा जाता है।  उससे काफी लोग योग सीखने आ रहे हैं। इससे पहले उसने तीन साल तक योग का कठिन अभ्यास किया। यही नहीं, सुन ने योग में सर्टिफिकेट कोर्स किया है। तेजोऊ सिटी में योग सीखने के बाद वह लोगों को योग सिखाने लगा। Image - China Daily सुन की उपलब्धि से उसके माता-पिता बहुत खुश हैं। उसकी मां ने ब...

सांप के जहर से हाथ गंवा चुके इस डॉक्टर ने मरीजों के लिए किया 4 लाख किमी का सफर

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Image - New China हर इन्सान के जीवन में कुछ बुरे क्षण आते हैं। जो उस वक्त हिम्मत नहीं हारता, वह दूसरों के लिए मिसाल बन जाता है। कुछ ऐसी ही कहानी चीन के एक डॉक्टर ली यान की है जिनका सिर्फ एक हाथ है, लेकिन वे अपने मरीजों की सेवा के लिए हमेशा तत्पर पर रहते हैं।  स्थानीय मीडिया के अनुसार, डॉ. ली मरीजों के इलाज के लिए अब तक 4 लाख किमी से ज्यादा का सफर तय कर चुके हैं। न्यू चाइन की एक खबर के अनुसार, डॉ. ली ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा के लिए जाने जाते हैं। उन्हें जब भी सूचना मिलती है, वे अपनी मोटरसाइकिल पर बैठकर मरीज के घर की ओर रवाना हो जाते हैं। डॉ. ली जियांग्सी प्रांत के टाउपो नामक कस्बे में सेवा दे रहे हैं। उनके पास काफी संख्या में ऐसे मरीज आते हैं जो ग्रामीण पृष्ठभूमि से हैं। यदि किसी मरीज की हालत ज्यादा गंभीर है और वह क्लिनिक तक नहीं आ सकता, तो ऐसे में डॉ. ली उसके घर चले जाते हैं।  डॉ. ली यह काम पिछले 27 वर्षों से कर रहे हैं। वे अब तक पांच मोटरसाइकिल खरीद चुके हैं, क्योंकि उन्हें अक्सर लंबा सफर तय करना होता है। अब वे इंटरनेट की मदद भी लेने लगे हैं, जिससे मरीजों...

सलाम इस हिम्मतवाली दादी मां को, जिसने 81 साल की उम्र में ली डिग्री

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Image - China Daily चीन में 81 साल की एक बुजुर्ग महिला की तस्वीरें इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब मशहूर हो रही हैं। लोग इन्हें सम्मान से हिम्मतवाली दादी मां कहने लगे हैं, क्योंकि इन्होंने जो काम किया है, वह सच में बेमिसाल है।  चीन के मशहूर अखबार चाइना डेली के अनुसार, इस बुजुर्ग महिला ने 81 साल की उम्र बैचलर डिग्री ली है। इनका नाम ज़ू मिन्ज़िउ है। इन्होंने तियानजिन विश्वविद्यालय से ई-कॉमर्स में बैचलर डिग्री कोर्स अच्छे अंकों से पास करने में कामयाबी पाई है। ज़ू मिन्ज़िउ की कहानी भी किसी आम भारतीय महिला जैसी है। युवावस्था में आर्थिक समस्याएं, परिवार की जिम्मेदारियां, समय की कमी जैसी परेशानियों के बावजूद इन्होंने अपना इरादा नहीं बदला और डिग्री हासिल कर ली।  डिग्री लेते हुए जब इनकी तस्वीरें चाइना डेली में छपीं तो यकायक उनकी चर्चा पूरी दुनिया में होने लगी। लोगों ने इनकी हिम्मत को सराहा। ज़ू मिन्ज़िउ ने विभिन्न अखबारों को इंटरव्यू देते हुए बताया कि उनके लिए ज़िंदगी का मतलब है - चुनौतियों के बावजूद खुद में सुधार करते जाना। उन्होंने यूनिवर्सिटी को धन्यवाद कहा जिसकी बदौल...

बुजुर्ग छात्र के हौसले को सलाम, जो 70 की उम्र में जाते हैं स्कूल

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Image - HuffingtonPost हमने समाज में अक्सर लोगों को यह शिकायत करते सुना है कि बुढ़ापा ज़िंदगी का आखिरी पड़ाव है,  जहां पहुंचकर कोई इन्सान कुछ नहीं कर सकता। इस मान्यता को गलत साबित कर दिया है नेपाल के एक बुजुर्ग विद्यार्थी ने। इनकी उम्र भले ही 70 साल हो लेकिन पढ़ाई के प्रति इनका हौसला किसी नौजवान से कम नहीं है। ये मध्य नेपाल के फेडीखोला में रहते हैं। इनका नाम है दुर्गा कामी। बचपन में आर्थिक समस्याओं की वजह से ये स्कूल नहीं जा पाए, जिसका उन्हें बहुत मलाल रहा।  इन्होंने अपने मन में शिक्षा की लौ को मंद नहीं पड़ने दिया और आखिरकार स्कूल में दाखिला ले ही लिया। वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों से उनकी उम्र भले ही बहुत ज्यादा हो लेकिन वे सबके साथ सहपाठी की तरह मिलजुलकर रहते हैं।  वे एक अनुशासित विद्यार्थी की तरह यूनिफॉर्म पहनते हैं और बैग उठाकर विद्यालय जाते हैं। वे प्रार्थना सभा में लाइन में खड़े होते हैं और कक्षा में पूरा दिन पढ़ाई करते हैं। यही नहीं, वे होमवर्क भी समय पर करते हैं।  दुर्गा कामी की यह कहानी सामने आने के बाद उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर...

यहां मिलेगा उपयोगी पत्रिकाओं और किताबों का खजाना

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