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लाइब्रेरी के आधारभूत नियम

Tamaso Mā Jyotir Gamaya (From Darkness Lead Me To The Light)  Iqra Bismi Rab Bikal Lazee Khalaq (Recite In The Name Of Your Lord Who Created -) 1. हम लाइब्रेरी के सदस्य यह संकल्प लेते हैं कि अपने परिश्रम, ज्ञान तथा संसाधनों से इस धरती को और सुंदर, और बेहतर जगह बनाने की कोशिश जारी रखेंगे।   2. हम हर धर्म, पंथ, जाति, रंग, नस्ल, लिंग और राष्ट्रीयता का सम्मान करेंगे तथा इनके आधार पर किसी से कोई भेदभाव नहीं करेंगे। 3. किसी के खानपान, पहनावे, रंग-रूप तथा विचारों का उपहास नहीं उड़ाएंगे। हम मनुष्य की गरिमा का सम्मान करेंगे। 4. लाइब्रेरी में धर्म, राजनीति, प्रांत, जाति, अंधभक्ति या अन्य किसी भी आधार पर कट्टरपंथ के लिए कोई जगह नहीं होगी। बेहतर होगा कि हर किस्म के कट्टरपंथी हमसे दूर रहें। 5. लाइब्रेरी का किसी भी किस्म की राजनीतिक विचारधारा से कोई संबंध नहीं है। 6. हम लाइब्रेरी के सदस्य सबसे पहले मानवता में विश्वास रखते हैं। लाइब्रेरी द्वारा ऐसे किसी भी व्यक्ति, विचार, कार्य और आविष्कार अादि का समर्थन नहीं किया जाएगा जो मानवता के विरुद्ध...

संस्थापक के बारे में

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नाम: राजीव शर्मा जन्म: 6 अगस्त, 1987  ज्यादातर स्कूली शिक्षा कोलसिया (झुंझुनूं-राज.) के राजकीय विद्यालय से प्राप्त की। साल 2000 में कुछ किताबों के साथ पुराने घर में लाइब्रेरी की शुरुआत। 2005 में एक सड़क दुर्घटना के बाद नेचुरोपैथी का अध्ययन तथा स्वयं पर इसके प्रयोग।  24 वर्ष की उम्र में एक राष्ट्रीय पत्रिका में नेचुरोपैथी पर नियमित कॉलम लेखन। हिंदू, जैन और इस्लाम धर्म की शिक्षाओं का मारवाड़ी में अनुवाद।  क़ुरआन का मारवाड़ी में अनुवाद, जिसे भारत सहित पाकिस्तान, बांग्लादेश, आॅस्ट्रेलिया, अमेरिका, सऊदी अरब, यूएई, ब्रिटेन, इराक, नाइजीरिया, श्रीलंका, तुर्की आदि में बहुत सराहा गया। अनेक विद्यार्थियों को सुंदर हस्तलिपि (हैंडराइटिंग) का प्रशिक्षण।  प्रस्तुति : आकाश

The Old Ink Library की शुरुआत कैसे हुई?

नमस्कार साथियो! मेरा नाम राजीव शर्मा है। The Old Ink Library के इस ब्लॉग पर मैं आपका स्वागत करता हूं। आकार और संसाधनों के मामलों में यह एक छोटी लाइब्रेरी है लेकिन हमारा मकसद यकीनन बड़ा है। वह है — यह दुनिया हमें जिस रूप में मिली है, उसे और सुंदर और बेहतर जगह बनाना।  साल 2000 की सर्दियों में कुछ किताबों और बिना किसी नाम के इसकी शुरुआत मैंने एक छोटे-से कमरे में की थी। तब से अब तक बहुत कुछ बदल चुका है लेकिन मैं मानता हूं कि कुछ चीजें वक्त बदलने के बावजूद कभी नहीं बदलतीं। शिक्षा का उजाला एक ऐसी ही शक्ति है।  मैंने इसकी स्थापना मेरे गांव कोलसिया में की थी जो राजस्थान के झुंझुनूं जिले में स्थित है। अब मैं लाइब्रेरी को नए रूप में पेश कर रहा हूं, जिसमें इंटरनेट की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होगी, ताकि यह उन लाखों बच्चों तक भी पहुंच सके जिनके बस्तों में कॉपी-किताबें, पेंसिल के छिलके, रबर के टुकड़े और फिरकी के अलावा ढेरों सपने कैद हैं।  इस लाइब्रेरी के नामकरण के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है। स्कूली पढ़ाई के दौरान हमारे अंग्रेजी के शिक्षक श्री सरदार सिंहजी इस बात पर खास ...